रविवार, 11 जनवरी 2009

कल्याण के तेवरों से झुलसने लगी भाजपा

कल्याण सिंह के उग्र तेवरों से फूट रही चिंगारियां अब भाजपा को झुलसने लगी हैं। उनके पुत्र राजवीर सिंह ने बुलंदशहर सीट के घोषित उम्मीदवार अशोक प्रधान को क्षेत्र में घुसने नहीं देने की कसम खा ली है। इससे माहौल ऐसा बन गया है कि पार्टी कहने को तो 2009 लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है, लेकिन परिदृश्य 1999 जैसा लगने लगा है, जब कल्याण सिंह इसी तरह चिंगारियां छोड़ रहे थे।
शनिवार को बुलंदशहर में राजवीर सिंह और अशोक प्रधान समर्थकों के बीच टकराव की नौबत आ जाने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। जाहिर है कि कल्याण सिंह जैसे कद्दावर नेता के क्षेत्र में पार्टी की फजीहत हुई, लेकिन पूर्वमंत्री लालजी टंडन कहते हैं कि इसमें अनुशासनहीनता जैसी कोई बात नहीं। एक को टिकट मिलने पर अन्य दावेदारों का गुस्सा फूटना स्वाभाविक है। टंडन के मुताबिक, नामांकन होने तक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आती। अशोक प्रधान इस तर्क से सहमत नहीं। उन्होंने जागरण से कहा कि पार्टी के भीतर प्रतिक्रिया वाजिब है, लेकिन सड़क पर कतई नहीं।
प्रधान कहते हैं कि शनिवार को राजवीर सिंह समाजवादी पार्टी द्वारा प्रयोजित गुंडे लेकर उनसे टकराने आए थे। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व से राजवीर के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
अशोक प्रधान को बुलंदशहर सीट पर टिकट देने का विरोध खुद कल्याण सिंह कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछले विधानसभा चुनाव में प्रधान ने भितरघात करके उनके पुत्र राजवीर को डिबाई सीट पर हरवा दिया था। कल्याण सिंह घोषणा कर चुके हैं कि वह बुलंदशहर सीट पर प्रधान को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे, यद्यपि प्रधान का दावा है कि कल्याण सिंह के विरोध के बावजूद वह चुनाव जीत जाएंगे।
बहरहाल, रविवार को वरिष्ठ नेता लालजी टंडन द्वारा खुलकर राजवीर सिंह की तरफदारी करने से संकेत मिलने लगे कि इस प्रकरण के बहाने पार्टी की गुटबाजी दोबारा सिर उठाने लगी है। टंडन से पूछा गया कि क्या प्रधान की सीट बदली जा सकती है? उन्होंने कहा कि नामांकन से पहले कुछ भी संभव है। कल्याण सिंह यही मांग कर रहे हैं।
उधर, प्रधान का कहना है कि राजवीर सिंह का आचरण गंभीर घटना है। केंद्रीय व प्रांतीय नेतृत्व के अलावा खुद कल्याण सिंह को भी सोचना चाहिए कि पार्टी अनुशासन को लेकर उनके बेटे और किसी अन्य कार्यकर्ता के लिए क्या अलग-अलग नियम हैं? कल्याण सिंह द्वारा शनिवार की घटना को जन-प्रतिक्रिया करार दिए जाने पर प्रधान ने सवाल उठाया कि राजवीर इतने लोकप्रिय हैं, तो डिबाई में चुनाव कैसे हार गए?
विरोध पूरी तरह जायज : कल्याण कल्याण सिंह नहीं मानते कि उनके पुत्र राजवीर सिंह ने कोई अनुशासनहीनता की। शनिवार की घटना को पूरी तरह जायज ठहराते हुए उन्होंने जागरण से कहा कि जिस अशोक प्रधान ने विधानसभा चुनाव में भितरघात करके भाजपा को छह-सात सीटों पर हरवाया, उसे बुलंदशहर की जनता क्षेत्र में कैसे घुसने देगी।
उन्होंने कहा कि यह राजवीर का अपना क्षेत्र है, लिहाजा वह भी मौके पर पहुंच गए थे, लेकिन असलियत यह है कि पूरे संसदीय क्षेत्र से इतनी बड़ी संख्या में लोग जमा थे कि प्रधान की बुलंदशहर में घुसने की हिम्मत नहीं पड़ी।

गौरव गजराज को उड़ायेगी देश की पहली महिला पायलट

जागती हुयी आंखों से देखे जाने वाले सपने, कैसे हकीकत में बदल जाते है यह सीखा जा सकता है भारतीय वायुसेना की स्कवाड्रन लीडर वीना सहारन से, जिन्होंनें बचपन में आकाश में उड़ते विमानों को देखकर उन्हें उड़ाने की कल्पना की थी जो अब हकीकत बन गयी है। वे अब भारतीय वायुसेना का गौरव कहे जाने वाले आई एल. 76 गजराज को उड़ाने वाली है। वे देश की
पहली ऐसी महिला पायलट हो जायेगी, जिन्हें गजराज विमान को उड़ाने का अवसर प्राप्त होगा।
मिलेट्री हेडक्वाटर ऑफ वार महू में सीनियर स्टाफ आफिसर के रूप में पदस्थ कर्नल एच.एन.सहारन अपनी 27 वर्षीय पुत्री की इस
गौरव शाली उपलब्धि पर सीना फुलाये कहते हैं यह एक माता-पिता के लिये गौरव का क्षण होता है। उन्होंनें बताया कि वीना का बचपन का ख्वाव हकीकत में बदल जायेगा इसकी उन्हें आशा ही नहीं पूरा विश्वास था।
मूलत: जयपुर के रहने वाले कर्नल सहारन अपनी बेटी के बचपन को याद करते हुये बताते है कि वीना शायद चौथी कक्षा में रही होगी।
हम जयपुर केन्टोनमेंट में रहा करते थे। वीना का लगाव एयरोप्लेन के प्रति इतना अधिक था कि वह अपने घर की छत पर ही हल्के-फुल्के माइक्रोलाइट विमान उड़ाया करती थी और जब आसमान में उड़ते विमान देखती तो अपनी मां से कहती कि मैं भी एक दिन ऐसा ही विमान उड़ाऊंगी। सेना में पदस्थ होने के कारण बचपन से ही सैन्य परिवेश में रही वीना ने दिल्ली से बी.एस.सी. आनर्स की डिग्री प्रथम स्थान पर प्राप्त करने के साथ एन.सी.सी का सी प्रमाण पत्र और पर्वतरोहण का
पाठयक्रम भी पास किया। कर्नल सहारन बताते है यह 2001 की बात है। वीना ने भारतीय वायुसेना में आफि सर के लिये आवेदन किया और उसका चयन हो गया। दिसम्बर 2002 में उन्हें कमीशन भी प्राप्त हो गया था।
वीना के पिता बताते हैं और इन सात सालों में उसने इतिहास रच दिया। वीना ने वायुसेना के विमानों में दो हजार घन्टों की सफल उड़ान
भरी। वायुसेना की चंडीगढ़ स्थित 25 वीं स्कवाड्रन में उन्होंने ए.एन.32 प्लेन से तमाम कठिनाई वाले लक्ष्य की उड़ान भरी और सफल रही जैसे लेह, लद्दाख और सियाचिन। ए.एन 32 में दो शक्तिशाली इंजन के अलावा सात टन वजन ले जाने की क्षमता रहती है।
वीना की पिछली सफल उड़ान और उनके अन्य रिकार्ड को देखते हुये उनका चयन आई.एल.76 को उड़ाने के लिये किया गया है। उल्लेखनीय है कि आई.एल.76 भारतीय वायुसेना का विशालतम जहाज है, गजराज के नाम से मशहूर इस जहाज में चार शक्तिशाली इंजन होते है और इसमें 43 टन वजन ढोने की क्षमता रहती है। इस विमान को अब तक किसी महिला पायलट ने नहीं उड़ाया है। स्कवाड्रन लीडर वीना सहारन देश की पहली महिला पायलट होंगी जिन्हें यह अवसर प्राप्त हो रहा है। वीना को इसके लिये आगरा और नागपुर एयरवेस पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
अपने पिता कर्नल सहारन से महू मिलने आई वीना आज सुबह ही नागपुर एयरवेस के लिये रवाना हुयी हैं। लगभग तीन माह के प्रशिक्षण के बाद वीना गजराज को उड़ायेंगी। उल्लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना में गजराज आई.एल.76 को उड़ाना एक गौरव और सम्मान माना जाता है। यह सम्मान अब देश की एक बेटी को प्राप्त हो रहा है।

हड़तालियों की सांस टूटने के कगार पर

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल को लेकर सरकार कभी गरम तो कभी नरम की नीति अपना रही है। इस वजह से लोगों की तकलीफें दूर होने का नाम नहीं ले रहीं। लेकिन जल्द ही इससे निजात मिल सकती है। ट्रक हड़ताल के खिलाफ एक जनहित याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस पर फैसले का इंतजार सभी को है। यदि फैसला ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ आया तो सरकार की सख्ती बढ़ जाएगी और ट्रांसपोर्टरों के हौसले एकदम पस्त हो जाएंगे।
वैसे सरकार का दावा है कि ट्रक हड़तालियों के हौसले टूटने लगे हैं। उसका कहना है कि कई क्षेत्रीय संगठनों ने हड़ताल खत्म कर दी है। ट्रक मालिक भी सरकार के साथ हैं। जनता तो हड़तालियों के साथ नहीं ही है। ऐसे में हड़ताली कभी भी हथियार डाल सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने शुक्रवार को ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया है कि हड़ताल से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तथा जनता की तकलीफें बढ़ती जा रही हैं। याचिका में ट्रक हड़ताल को गैर कानूनी घोषित और ट्रकों के परमिट रद करने की मांग की गई है।
सरकार को पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट सोमवार को जनता के हित में फैसला सुनाएगा। शायद यही वजह थी कि रविवार को परिवहन सचिव ब्रह्मा दत्त के तेवर तीखे थे। एक दिन पहले परिवहन मंत्री टी.आर. बालू ने हड़तालियों के प्रति काफी नरम रुख दिखाया था।
रविवार को ब्रह्मा दत्त ने कहा कि ट्रांसपोर्टर रोज नई मांगें रख रहे हैं, जिन्हें मानना संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि तमाम क्षेत्रीय एसोसिएशन के हड़ताल से तौबा कर लेने के बाद हड़ताली ट्रांसपोर्टरों की हिम्मत टूटने ही वाली है। उन्होंने हड़ताल को राष्ट्रविरोधी भी बताया।
संवाददाताओं से बातचीत में ब्रह्मा दत्त ने कहा कि हड़ताल से निपटने के लिए 15-20 लाख ट्रकों का संचालन जल्द ही शुरू किया जाएगा। इस संबंध में विचार के लिए राज्यों के परिवहन मंत्रियों को सोमवार को दिल्ली बुलाया गया है। इस बैठक में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी उपायों पर चर्चा होगी। परमिट संबंधी ट्रांसपोर्टरों की मांग पर भी चर्चा होने की संभावना है।
परिवहन सचिव के मुताबिक हरियाणा के गुड़गांव, राजस्थान के जयपुर, महाराष्ट्र के पुणे तथा कर्नाटक के हासन समेत अनेक नगरों में क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने हड़ताल खत्म कर दी है। ट्रक मालिकों के संगठन आल इंडिया कंफेडरेशन आफ गुड्स वेहिकल ओनर्स [आइकोगोआ] ने हड़ताल से निपटने में सरकार को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है। यह संगठन शुरू से ही हड़ताल से अलग है।
सरकार ट्रांसपोर्टरों के साथ पुचकार-दुत्कार की दोहरी नीति अपना रही है। परिवहन मंत्रियों की बैठक बुलाना भी इसी का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि इससे जमीनी हकीकत का पता चलेगा और आगे की कार्रवाई में सहूलियत रहेगी। यदि राज्य सरकारों से सहयोग मिला और आइकोगोवा के ट्रक चल निकले तो आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस [एआईएमटीसी] की अकड़ टूटने में वक्त नहीं लगेगा। वैसे भी तेल कंपनियों के अधिकारियों की ही तरह हड़ताली ट्रांसपोर्टरों के साथ भी जनता की रत्ती भर सहानुभूति नहीं है। इसलिए हड़ताल खत्म होना ज्यादा मुश्किल नहीं है।

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

मेए बचा हूए ...

मैं इसलिए बचा हूँक्योंकि मैं घर में बैठा हूँ.....यदि मैं भी वहाँ होता गेटवे या ताज पर तोआप सब मेरा शोक मना रहे होते।मैं इसलिए बचा हूँ क्योंकि मैंवहाँ नरीमन हाउस में नहीं थाओबरॉय में नहीं था जहाँ गोलियाँ चल रही थीं....जहाँ मौत का महौल था।मैं सच में केवल इसलिए बचा हूँ क्योंकिमैं बच-बच कर रह रहा हूँमैं बच-बच कर जीने का अभ्यासी हो गया हूँजब से पैदा हुआ यही सिखाया गयासब यही कहते पाए गए हैं कि बच के रहनाउधर नहीं जाना, उससे नहीं लड़नाघर में रहनासावधान रहनाअपना ध्यान रखना....और मैंघर में हूँअपना ध्यान रख रहा हूँकिसी से नहीं लड़ रहा हूँबच कर रह रहा हूँइसीलिए अब तकबचा हूँ। इसलिय बचा हूए..

अपनी कलम को हथियार बना



अपनी कलम को हथियार


बनाशब्दों में बारूद भरे


सोया समाज राख समान


उसमे कुछ आग लगे


दूसरी ओर ऐसे भी सोचते लोग मिले


बहुत दिनों से मैं जानना चाहता हूँ कि आख़िर ये एनकाउंटर स्पेशलिस्ट क्या बला है।क्या ये वाकई कोई पद है जिसका आधिकारिक रूप से सृजन किया गया है या फ़िर ये मीडिया प्रदत्त उपाधि है ।मैं जानना चाहता हूँ कि कोई एनकाउंटर का स्पेशलिस्ट कैसे हो सकता है? कैसे कोई लोगों को मारने का स्पेशलिस्ट हो सकता है। ये स्पेशलिस्ट लोगों को मारता कैसे है घातलगाकर या आमने सामने कि लड़ाई में या पकड़ कर मुहँ में पिस्टल ठूंस कर...........................

बस हमारे खेत तक पानी भिजवा दें शिवराज

भोपाल। समय - दोपहर पौने चार बजे
स्थान - राजधानी का जम्बूरी मैदान
दृश्य एक - भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल माधव दवे इशारे से सामने बेरीकेड्स के पीछे खड़े लोगों को इशारा कर आगे की खाली कुर्सियों की और आने को कहते हैं। बस फिर क्या था। मानो वहां हजारों की संख्या में जमा लोगों को इसी का इंतजार था। वे पुलिस की सख्ती और बेरीकेड्स के बंधन तोड़ आगे की और दौड़ते हैं। फिर जिसे जहां जगह मिलती है, वहां खड़े हो जाते हैं, जो भाग्यशाली होते हैं उन्हें कुर्सी मिल जाती है। अभी एसएएफ का एक जवान उन्हें पीछे हटाने के लिए डंडा उठाता ही है कि भीड़ में से एक साठ का वृद्ध आवाज लगाता है, बेटा एक बार शिवराज मामा को देखने तो दे, बस सिपाही का हाथ नीचे आ जाता है। ऐसे कई नजारे शुक्रवार को जंबूरी मैदान पर कई बार देखने को मिले।
भिंड जिले के अटेर से पहुंचे शिवेन्द्र सिंह तोमर मैदान में हाथ में कागज का एक पुलिंदा लिए घूम रहे थे। इसमें पहले पेज पर मुख्यमंत्री के लिए एक कविता लिखी गई थी, पीछे के पेज पर एक मांग पत्र था। उनका कहना था, बस ये शिवराज सिंह हमारे खेत तक पानी और पहुंचा दें हमारी जिंदगी सुधर जाए।
मुलताई निवासी गंगा बाई मस्कुले की बेटी राम बाई के यहां बेटी पैदा हुई हैं। वे अपनी नातिन को लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ दिलाने पहुंची थीं। उनकी शिकायत थी कि आंगनवाड़ी वाले उसे चक्कर कटवा रहे हैं। धार के मानपुर का शंकरलाल झरिया केवल मुख्यमंत्री को देखने भोपाल आया था। उनका कहना था कि पिछली बार मुख्यमंत्री उनके जिले में आए थे। तब वे कई घोषणा कर गए थे। इनमें से ज्यादातर पूरी हो गई थी। इसी कारण वे उन्हें धन्यवाद देने आए हैं।
जबलपुर के पाटन से आए भैयालाल तिवारी मुख्यमंत्री को उनके वे वादे याद दिलाने आए थे तो मुख्यमंत्री ने जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान जबलपुर में किए थे। उनकी मांग थी मुख्यमंत्री उनके इलाके और जिले की सड़कों पर भी ध्यान दें। नरसिंहपुर के गोटेगांव का पन्नालाल राय अपने शिवराज मामा की एक झलक पाने की हसरत लिए भोपाल आया था। पिछली बार वह मुख्यमंत्री से आधी रात के वक्त गोटेगांव में मिला था। तब उसकी बात करने की हसरत पूरी नहीं हो पाई थी ,लेकिन उसने मुख्यमंत्री को नौकरी के लिए आवेदन दिया था। वह उसी आवेदन पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराना चाहता था। भैंसदेही का ललिता कुनबी चाहती थी कि मुख्यमंत्री एक बार फिर उनके कस्बे में आएं। जिससे कि वहां की सड़कों और पानी की व्यवस्था कुछ सुधर जाए। उनकी शिकायत थी कि अधिकारी शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
भीड़ में ज्यादातर लोग केवल मुख्यमंत्री से हाथ मिलाने, उनकी झलक देखने या फिर उनसे बात करने के इरादे से पहुंचे थे। 16 साल का किशोर हो या साठ साल का वृद्ध, सभी के शिवराज मामा थे। मुख्यमंत्री से मुलाकात की होड़ में शपथ ग्रहण समारोह समाप्त होते ही भीड़ ने सामने वाले बेरीकेड्स भी तोड़ डाले। वे मंच के पिछले हिस्से तक जा पहुंचे। जब शिवराज सिंह काफिले के साथ समारोह के बाद मुख्यमंत्री निवास के लिए निकले, तो उस समय भी लोग उनकी कार के साथ दौड़ने लगे। वे उनसे हाथ मिलाना और शक्ल दिखाना चाहते थे। इसी कारण उनकी सुरक्षा में लगे जवानों को समस्या का सामना करना पड़ा।

जेल में कैदी पर ब्लेड से हमला

भोपाल। करोद स्थित देश की पहली आईएसओ केन्द्रीय जेल में एक कैदी ने दूसरे कैदी पर ब्लेड से हमला कर दिया। हमले के बाद उसने खुद भी अपनी गर्दन पर ब्लेड मार जान देने का प्रयास किया। दोनों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। जेल प्रशासन की शिकायत पर वारदात के दो दिन बाद गांधीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक कैदी हरिकिशन मादक पदार्थो की तस्करी के मामले में जेल में बंद है। इसी जेल में कल्लू उर्फ चिकना उर्फ दिनेश पुत्र महेन्द्र मीणा (23) भी चोरी के मामले में बंद है। पिछले दिनों जेल में कल्लू और हरिकिशन के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। दोनों में जमकर लात-घूंसे चले थे। जेल प्रबंधन ने किसी तरह दोनों को अलग कर दिया था। 11 दिसंबर को एनडीपीएस कोर्ट में हरिकिशन की पेशी थी। प्रहरी लाल सिंह अहिरवार उसे अन्य कैदियों के साथ बाहर ला रहा था। जैसे ही हरिकिशन जेल के तीन नंबर गेट के सामने पहुंचा, वहां कल्लू पहले से खड़ा था। उसने हरिकिशन पर ब्लेड से हमला कर दिया। हरिकिशन के चेहरे और हाथ पर उसने कई वार किए। चीख पुकार सुन प्रहरी और अन्य कैदियों ने किसी तरह उसे पकड़ा तो आरोपी ने ब्लेड से खुद का हाथ और गला काट लिया। दोनों को आनन-फानन में जेल के अस्पताल में दाखिल करा दिया गया।
पहले तो जेल प्रबंधन मामले पर पर्दा डालने का प्रयास करता रहा। बाद में शनिवार को प्रबंधन ने गांधीनगर थाने में एक लिखित आवेदन दिया। इसके बाद रात में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने दोनों का मेडिकल भी कराया है।
खुली जेल की सुरक्षा की पोल: इस घटना ने जेल में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। पूरी तलाशी के बाद ही जेल में कैदियों को दाखिल होने दिया जाता है।
इसके बाद भी कल्लू के पास ब्लेड पहुंच गई और उसने हमला कर दिया। जेल प्रशासन का तर्क है कि तीन-चार माह पहले दाड़ी बनाने के दौरान कल्लू ने इस्तेमाल की हुई ब्लेड अपने पास छुपाकर रख ली थी। हमले में उसने इसी ब्लेड का इस्तेमाल किया।